गर्मी का पारा चुनावी मुसीबत...?

गर्मी का पारा चुनावी मुसीबत...?

PUBLISHED : Apr 30 , 9:17 AMBookmark and Share

<p>गर्मी का पारा चुनावी मुसीबत...?<br /> तेज गर्मी में मतदान  के प्रतिशत बढ़ाने की चुनौती <br /> <br /> भोपाल।लोकतंत्र के महायज्ञ में आहुति देने के लिए मतदाता तैयार तो है, लेकिन भीषण गर्मी बहुत बड़ी चुनौती के रूप में उसके सामने है। यही कारण है कि मतदाताओं को लुभाने के तमाम प्रयासों के बाद भी चुनाव आयोग और सियासी दल मतदान के लिए वोटरों को घर से निकालने को लेकर तनाव में हैं। देश में अभी तक हुए मतदान में कुछ राज्यों को छोड़ बाकी जगह पिछली बार के मुकाबले कम मतदान हुआ है। <br /> मध्यप्रदेश की 29 अप्रेल से लोकसभा सीटों पर तीन चरणों में मतदान होना है। मालवा-निमाड़ में 19 मई को चुनाव होना है। तब गर्मी के तेवर और ज्यादा तीखे रहेंगे और पारा 46 डिग्री के पार होने की संभावना बताई जा रही है। ऐसे में वोटिंग प्रतिशत पर ही सियासी दलों की हार-जीत टिकी है, क्योंकि इस बार कोई लहर नहीं है। बुधवार को खरगोन में तापमान 45 डिग्री, धार और खजुराहो में 44 डिग्री सेल्सियस रहा है। जबकि ग्वालियर में 43 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य शहरों में 42 और 41 डिग्री तापमान रहा है। सिर्फ होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी कस्बे में 38 डिग्री तापमान है। चुनाव आयोग ने इस बार प्रदेश में मतदान 10 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य अवश्य रखा है, लेकिन इसमें गर्मी बड़ी बाधा बनेगी। सबसे ज्यादा दिक्कत मप्र के चौथे चरण के मतदान में आएगी। अभी राजधानी भोपाल में पारा लगातार चालीस डिग्री के पार चल रहा है, यहां 12 मई को मतदान है और तब यहां भी गर्मी चरम पर रहेगी। ऐसे में मतदाताओं को घरों से निकालना बड़ी चुनौती है। पिछले 28 साल के लोकसभा चुनाव के मतदान के प्रतिशत पर नजर डालें, तो पता चलता है कि 1998 में अटल लहर और 2014 में मोदी लहर के चलते 61 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था। शेष चुनाव में 55 फीसदी से कम वोटिंग रही है। इस बार भी कोई लहर नहीं है। ऊपर से गर्मी के तेवर तीखे रहने की आशंका है। ऐसे में मतदान के प्रतिशत में कितनी बढ़ोत्तरी हो पाती है, कहना मुश्किल है। प्रदेश में पहले चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। ऐसे में सभी दलों के प्रत्याशी केंद्रीय नेताओं की सभाएं कराने के साथ घर-घर दस्तक देने लगे हैं। चढ़ते तापमान के बीच मतदान ज्यादा कराने की चिंता में डूबे चुनाव आयोग ने मतदाताओं की चिंता करना शुरू कर दिया है। सिर्फ आयोग ही नहीं, पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत को लेकर सियासी दल भी तनाव में हैं। देखा जाए तो देश में पहले, दूसरे और तीसरे चरण के मतदान के प्रतिशत ने भी सियासी दलों के गुणा-भाग को बिगाड़ दिया है। तीसरे चरण में 66.4 प्रतिशत वोटिंग हुई है, जो 2014 के मुकाबले चार प्रतिशत कम है। चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की चिंता रमजान को लेकर भी है। चिंता का कारण इबादत में व्यस्त मुस्लिम मतदाताओं को घरों से निकालने की है। पिछले चुनाव में प्रदेश में भाजपा ने सबसे ज्यादा 26 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी। इस बार भाजपा को उसी के पक्ष में नतीजे आने की उम्मीद है। भाजपा नेताओं का मानना है कि मतदान प्रतिशत बढ़े या घटे, रहेगा भाजपा के पक्ष में। जबकि कांग्रेस के नेता मानते हैं कि ज्यादा मतदान पार्टी के पक्ष में जाएगा। हालांकि इस दौर में बढ़े हुए वोटिंग परसेंट को लेकर कोई भी संभावना इसलिए व्यक्त नहीं की जा सकती, क्योंकि एक तो जनता जागरूक हो गई है और दूसरा चुनाव आयोग व राजनीतिक दल भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास करते हैं। चुनाव आयोग ने 10 फीसदी मतदान बढ़ाने का जो लक्ष्य रखा है, इस हिसाब से प्रदेश में 71 फीसदी मतदान होना चाहिए। इसके लिए आयोग मैदानी स्तर पर जोर-शोर से मतदाताओं को लुभाने में जुटा है। जिला निर्वाचन अधिकारी नवाचार कर मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, तो मतदान केंद्रों पर ठंडे पानी, कूलर-पंखे, कतार में लगने वाले मतदाताओं के लिए छांव (टेंट) की व्यवस्था कर रहे हैं। कोशिश यह है कि बीमार और दिव्यांग मतदाताओं को भी लाकर मतदान कराया जा सके। ऐसे ही मतदाताओं को लुभाने के लिए गुना में पांच सौ आकाशदीप छोड़े गए, तो जबलपुर में रेडियम से स्लोगन लिखी टी-शर्ट लोगों को पहनाई गईं, ताकि मतदाता मतदान के लिए प्रेरित हो। मतदान के कुछ चरण तो रमजान माह के दौरान होंगे, उस दौरान मुस्लिम मतदाता को घर से  निकलवाना बहुत बड़ी चुनौती होगा। आयोग और राजनीतिक दलों की तैयारियों के बीचवोट देने के लिए कितने लोग निकल पाएंगे, यह देखना होगा।<br />  </p>

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