विधानसभा के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को रेमंड्स की वर्दी

विधानसभा के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को रेमंड्स की वर्दी

PUBLISHED : Sep 04 , 9:21 PMBookmark and Share


विधानसभा के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को रेमंड्स की वर्दी

टेंडर 5 सितम्बर को, नगद देने का सिस्टम बदला.
भोपाल। मप्र विधानसभा सचिवालय के चतुर्थ श्रेणी पुरुष एवं महिला कर्मचारियों के लिये नवीन ड्रेस खरीदी जायेंगी। इसके लिये टेण्डर कॉल कर दिये गये हैं तथा ये टेण्डर  5 सितम्बर को खोले जायेंगे।

विधानसभा सचिवालय चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिये पंजीकृत फर्मों से निर्धारित मात्रा एवं क्वालिटी का कपड़ा खरीदेगा। इसमें सफेद टेरीकाट कपड़ा रेमण्ड्स क्वा. क्र. 2824 ट्राविन 564 मीटर, नेवी ब्लू पेंट का कपड़ा  रेमण्ड्स क्वा. क्र. 2824 48 मीटर, स्काई ब्लू शर्ट का कपड़ा रेमण्ड्स क्वा. रेमण्ड्स क्वा. क्र. 1203 सौ मीटर, साडिय़ां मेहरुन कलर की 48 नग, ब्लाउज का कपड़ा मेहरुन कलर 48 मीटर, ब्लेक लेदर शूज चौकीदारों के उपयोगार्थ 20 जोड़, ब्लेक लेदर बेल्ट चौकीदारों के उपयोगार्थ 20 नग, नेवी ब्लू मोजे चौकीदारों के उपयोगार्थ 40 जोड़ तथा विसिल कार्ड, विसिल सहित चौकीदारों के उपयोगार्थ 20 नग।
पहले दी जाती थी नकद राशि :
विधानसभा के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को पहले शासन के नियमों के अनुसार ड्रेस हेतु नकद राशि दी जाती थी। परन्तु देखा गया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस नकद राशि से ड्रेस नहीं खरीदते थे। इसीलिये नियमों में संशोधन किया गया। अब ड्रेस का कपड़ा एवं उसकी सिलाई का खर्चा विधानसभा सचिवालय ही उठाता है तथा इसके लिये वह टेण्डर जारी करता है। इसी के तहत यह टेण्डर जारी किया गया है। टेण्डर में अधिक से अधिक लोग भाग लें इसलिये टेण्डर फार्म नि:शुल्क रखा गया है। लेकिन पंजीकृत फर्म को टेण्डर डालते समय दस हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट धरोहर राशि के रुप में देना होगा।
कुल 168 कर्मचारी हैं :
विधानसभा सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी के कुल 168 कर्मचारी हैं जिनमें 141 पुरुष और 27 महिलायें हैं। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के कार्यालय एवं बंगले हेतु कुछ कर्मी नियुक्त हैं जिन्हें पहले से ही ड्रेस दी जा चुकी है। अब इस टेण्डर के जरिये 114 पुरुष कर्मियों और 20 महिला कर्मियों के लिये ड्रेस खरीदी जाना है। इनमें चौकीदार भी शामिल हैं।
विस सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि विधानसभा सचिवालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिये नई ड्रेस खरीदी जाना है। एक साल छोडक़र यह ड्रेस खरीदी जाती है। पहले ड्रेस हेतु नकद राशि दी जाती थी परन्तु अब सचिवालय खरीद कर देता है और इनकी सिलाई भी करवाता है।

 

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