ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा से तीसरी बार हुआ पास, अब राज्यसभा में चुनौती

ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा से तीसरी बार हुआ पास, अब राज्यसभा में चुनौती

PUBLISHED : Jul 25 , 7:58 PMBookmark and Share

ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा से तीसरी बार हुआ पास, अब राज्यसभा में चुनौती
लोकसभा में फौरन तीन तलाक को अपराध बनाने वाला बिल गुरुवार को पास हो गया। इस बिल में यह प्रावधान है फौरन तीन तलाक देने पर पति को तीन साल तक कैद की सजा हो सकती है। द मुस्लिम वुमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल, 2019, जिसे तीन तलाक के नाम से जाना जाता है, इस विधेयक के कानून बनने से पहले अब राज्यसभा में पास कराना होगा।

इस बिल को लोकसभा में ध्वनिमत से पास किया गया। बिल के विरोध में कांग्रेस, टीएमसी, जेडीयू और बीएसपी के सांसदों ने लोकसभा से वॉकआउट किया।
तीन तलाक पर नया बिल आने के बाद प्रतिबंध है। इसी तरह का बिल 16वीं लोकसभा में बिल का रूप नहीं ले सका क्योंकि निचली सदन में पास होने के बावजूद ऊपरी सदन में इसकी मंजूरी नहीं मिल पाई थी।

2019 के मई में दोबारा चुनाव होने के बाद इस साल जून में नरेन्द्र मोदी सरकार ने तीन तलाक को अवैध बनाने के लिए फिर से विधेयक लेकर आई। तीन तलाक पर विधेयक को लोकसभा से मंजूरी के लिए पेश करते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह कानून इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इसे अवैध घोषित करने के बाद यह यह सिलसिला नहीं रुक पाया।
तीन तलाक बिल पर किसने क्या कहा?

लोकसभा में 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा की तरफ से यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट नहीं है। हम साफ करना चाहते हैं कि हमारा रुख स्पष्ट है। तीन तलाक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के फैसले का सबसे पहले कांग्रेस ने स्वागत किया था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध सिर्फ तीन तलाक को इसे फौजदारी मामला बनाने से है, जबकि यह दीवानी मामला है। गोगोई ने इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि लाखों हिंदू महिलाओं को उनके पतियों ने छोड़ दिया है, उनकी चिंता क्यों नहीं की जा रही है?

इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए और पतियों से अलग रहने को मजबूर सभी धर्मों की महिलाओं के लिए एक कानून बनना चाहिए।

 उन्होंने इस विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ करार देते हुए दावा किया कि यह विधेयक मुसलमानों की बर्बादी के लिए लाया गया है।

जावेद ने सवाल किया कि जब मुस्लिम पुरुष जेल में होगा तो पीड़ित महिला को गुजारा भत्ता कौन देगा? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार ने पहले मुस्लिम पुरुषों को आतंकवाद के नाम पर जेल में डाला, फिर भीड़ द्वारा हिंसा के जरिए निशाना बनाया और अब इस प्रस्तावित कानून के जरिए उनको जेल में डालना चाहती है।

कांग्रेस सांसद ने कि अगर सत्तारूढ़ पार्टी मुस्लिम महिलाओं के हित के बारे में इतना सोचती है तो उसके 303 सांसदों में एक भी मुस्लिम महिला क्यों नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि सरकार को भीड़ द्वारा हिंसा के शिकार परिवारों की चिंता क्यों नहीं हो रही है?   जावेद ने आरोप लगाया कि इस सरकार में अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है।

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