राष्ट्रविरोधी नारे लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं : जेटली

राष्ट्रविरोधी नारे लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं : जेटली

PUBLISHED : Feb 26 , 8:10 AMBookmark and Share



नई दिल्ली। राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने जम्मू कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) के साथ भारतीय जनता पार्टी (जनता) के गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों पर गुरुवार को कहा कि कश्मीर में अलगाववादियों के

खिलाफ लडऩे के लिए दोनों राष्ट्रीय दलों कांग्रेस तथा भाजपा को राज्य की मुख्यधारा की पार्टियों के साथ चलना होगा।

जेेटली ने सदन में \'जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय के विशेष संदर्भ में केंद्रीय उच्चतर

शिक्षा संस्थानों में उत्पन्न स्थिति\' पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि दोनों राष्ट्रीय दल कांग्रेस और भाजपा यह मानते हैं कि कश्मीर में अलगाववाद के खिलाफ लडऩे के लिए राज्य की मुख्यधारा की दोनों पार्टियों पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस

को साथ लेकर चलना होगा।

उन्होंने कहा, कश्मीर में भाजपा का पीडीपी के साथ गठबंधन मतभेदों के बावजूद इसी तथ्य को ध्यान रखकर किया गया है और यह देशहित में है। भाजपा नेता की इस टिप्पणी से सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने भी सहमति जताई। जेटली ने कांग्रेस पर जेएनयू और जादवपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रविरोधी नारे लगाने वाले लोगों के प्रति नरमी बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस उनको सहयोग दे रही है जो देश के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में एक प्रधानमंत्री और एक पूर्व प्रधानमंत्री की कुरबानी देने वाली कांग्रेस को राष्ट्र की अखंडता पर चोट पहुंचाने वाले लोगों के प्रति कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा आक्रामक होना चाहिए। यह समझा

जाना चाहिए कि यह भारत की धरती पर ही भारत के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है। यह देश को तोडऩे का प्रयास है।

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के सवाल पर जेटली ने कहा कि विश्वविद्यालय कोई स्वतंत्र देश नहीं है जो पुलिस को वहां जाने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़े। अगर संविधान का या कानून का उल्लंघन होगा तो पुलिस अपना काम करेगी। इसके उन्होंने जेएनयू की कई पुरानी घटनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि देश के टुकड़े करने, देश के खिलाफ जंग करने और देश को बरबाद करने के नारे लगाने की अनुमति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत नहीं दी जा दी सकती। यह तय करना होगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किस हद तक दी जा सकती है। यही मूल प्रश्न है। न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि यह वही न्यायालय है जिसने आधी रात को एक आतंकी की अपील पर सुनवाई की है।

उन्होंने कहा कि यह समझना चाहिए कि जेएनयू में आयोजित किया गया कार्यक्रम मनुवाद, पूंजीवाद या ब्राह्मणवाद के खिलाफ नहीं था, बल्कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के समर्थन में आयोजित किया गया था। याकूब मेनन पर

आयोजित कार्यक्रम में डा. अम्बेडकर का फोटो से उसे वैधता नहीं मिल सकती। इस बीच राज्यसभा की पूर्व उप सभापति नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि संसद में आज हम जीवित हंै तो इसलिए कि सुरक्षा अधिकारियों ने बलिदान दिया है। आज

हमले करने वाले अफजल की तरफदारी करने वालों का साथ दिया जा रहा है।

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