मोबाइल गेम ही नहीं किताबों से भी कराएं बच्चों की दोस्ती

मोबाइल गेम ही नहीं किताबों से भी कराएं बच्चों की दोस्ती

PUBLISHED : Aug 12 , 1:41 PMBookmark and Share



टेक्नोलॉजी का असर बच्चों पर इस तरह हो रहा है कि वे कोर्स से अलग कविता-कहांनियों की किताबें पढ़ना भूल गए हैं। वक्त मिलने पर मोबाइल पर गेम खेलना और वीडियो देखना ही उनकी पहली पसंद बन गया है। मगर किताबों से दोस्ती भी तो जरूरी है।

किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। यह बात अक्सर कही जाती है। लेकिन ये सिर्फ बड़ों के मामले में ही सच साबित नहीं होती, बल्कि बच्चों पर भी उतनी ही लागू होती है। बेशक आज के दौर में अधिकतर बच्चे कोर्स से अलग किताबें नहीं पढ़ पाते। वजह है मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर जैसे तकनीकी गैजेट्स। हालांकि बाजार में बच्चों की कहानी और कविताओं की किताबों की आज भी कोई कमी नहीं है। मगर समस्या है कि बच्चों में पढ़ने का शौक विकसित नहीं हो पा रहा। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह किताबों का शौक कैसे विकसित करें।

खुद पढ़कर सुनाएं
अपने नन्हे-मुन्ने का अपने जीवन में स्वागत करने के कुछ वर्षों बाद ही आप उसे कहानी पढ़ कर सुनाने की प्रक्रिया आरंभ कर दें। इससे न केवल आप का अपने बच्चे से बंधन मजबूत होगा बल्कि स्वाभाविक तौर पर उसे पुस्तकों से प्यार होने लगेगा। उम्र के छोटे पड़ाव से ही किताबों के साथ से बच्चों में पढ़ने की अच्छी आदत विकसित होती है। प्रयास करें कि प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट आप अपने बच्चों के साथ मिल कर बैठें और पढ़ें। पुस्तकों में कोई रोक न रखें, जो आप के बच्चे को पसंद आए, उसे वह पढ़ने दें।

पढ़ने के साथ समझना भी जरूरी
बच्चा तेजी के साथ किताब पढ़ पाए, यह हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि जो कुछ वह पढ़ रहा है, उसे समझ भी सके, इसके लिए आप को बीच-बीच में कहानी से संबंधित प्रश्न करना चाहिए। इससे बच्चा न केवल पढ़ता जाएगा, बल्कि उसे समझने की कोशिश भी करेगा। आप ऐसे प्रश्न पूछें, जैसे अब आगे क्या होना चाहिए, क्या फलां चरित्र ठीक कर रहा है, यदि तुम इस की जगह होते तो क्या करते। ऐसे प्रश्नों से बच्चे की कल्पनाशक्ति विकसित होगी।

बच्चे के रोलमॉडल बनें
यदि आप का बच्चा बचपन से पढ़ने का शौकीन है तब भी घर में किसी रोलमॉडल की अनुपस्थिति उसे इधर-उधर भटकने पर मजबूर कर सकती है। आप स्वयं अपने बच्चे की रोलमॉडल बनें और उसकी उपस्थिति में अवश्य पढ़ें। चाहे आप को स्वयं पढ़ना बहुत अधिक पसंद न भी हो तब भी आप को प्रयास करना होगा कि बच्चे के सामने आप पढ़ती नजर आएं। क्या पढ़ते हैं, यह आप की इच्छा है, लेकिन आप के पढ़ने से आप का बच्चा यह सीखेगा कि पढ़ना उम्र का मुहताज नहीं होता और हर उम्र में इंसान सीखता रह सकता है।

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