बिना दिल और लीवर के पाकिस्तान से भारत पहुंचा कृपाल सिंह का शव

बिना दिल और लीवर के पाकिस्तान से भारत पहुंचा कृपाल सिंह का शव

PUBLISHED : Apr 20 , 8:02 AMBookmark and Share




पाकिस्तान की लाहौर जेल में भारतीय कैदी कृपाल सिंह ने 11 अप्रैल को संदिग्ध हालात में दम तोड़ दिया था. उनका शव मंगलवार दोपहर भारत लाया गया.

कृपाल के घरवालों को आशंका है कि यह प्राकृतिक मौत का मामला नहीं है, बल्कि उनकी हत्या की गई है. परिजनों का कहना है कि कृपाल के शरीर पर चोट के निशान थे, लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने इससे इनकार किया है.
कृपाल के घरवालों ने कहा कि शरीर पर चोट और खून के निशान थे. कृपाल का पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल बोर्ड ने घरवालों की बात को गलत बताया है. बोर्ड ने कहा कि कृपाल के शरीर पर आंतरिक या बाहरी, किसी तरह के चोट के निशान नहीं थे.

लेकिन, तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड के प्रमुख डॉक्टर अशोक शर्मा ने संवाददाताओं से पोस्टमार्टम के बाद कहा कि मौत की वजह का अभी पता नहीं चल सका है.
उन्होंने कहा कि शरीर के कुछ अंग नहीं मिले, क्योंकि एक पोस्टमार्टम पहले ही (पाकिस्तान में) हो चुका है.  कृपाल के परिवार का कहना है कि शव के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान हैं. देर शाम तक अमृतसर के गुरु रामदास अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम में सामने आया कि कृपाल के शरीर में न तो दिल और न ही लीवर.
डॉक्टर शर्मा ने कहा कि पोस्टमार्टम में शरीर पर किसी तरह की बाहरी या अंदरूनी चोट नहीं मिली. शव का पोस्टमार्टम पहले ही (पाकिस्तान में) हो चुका है, शरीर और सिर में टांके लगे थे.

उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम में हमें कुछ अंग नहीं मिले, क्योंकि जब पोस्टमार्टम किया जाता है तो कुछ अंग निकालकर उनका परीक्षण किया जाता है कि कोई बीमारी तो नहीं थी.
डॉक्टर शर्मा ने कहा कि जो अंग मौजूद थे, हमने उनमें से कुछ को परीक्षण के लिए भेजा है, जिससे यह पता चल सके कि कोई बीमारी तो नहीं थी या फिर जहर तो नहीं दिया गया. मैं सौ फीसदी दावे से कह सकता हूं कि जीवन रहते जिन घावों के निशान बनते हैं, उन्हें मिटाया नहीं जा सकता. मौत की वजहों के बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है.
पाकिस्तानी अधिकारियों ने अटारी-वाघा सीमा पर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों को कृपाल सिंह का शव सौंप दिया. शव सौंपे जाने के समय कृपाल के परिजन और उनके गांव के निवासी मौके पर मौजूद थे.

शव को तुरंत पोस्टमार्टम के लिए अमृतसर ले जाया गया. वहां से अंतिम संस्कार के लिए कृपाल के गुरदासपुर जिला स्थित गांव ले जाया गया.

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. लेकिन, कृपाल के घरवाले इस बात से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि कृपाल की या तो कैदियों ने या जेल अधिकारियों ने हत्या की है.
अस्पताल के शवगृह के बाहर कृपाल के एक रिश्तेदार ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें (कृपाल) पाकिस्तानियों ने साजिश के तहत मारा है. वह लाहौर जेल में सरबजीत की हत्या के अकेले गवाह थे. हम चाहते हैं कि मामले की मुकम्मल जांच हो और मौत की वजहों का सच जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया जाए.

कृपाल सिंह के परिजनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 11 अप्रैल से पहले हमारी बात सुनी होती तो आज कृपाल सिंह जिंदा लौटते. कृपाल सिंह की बहन चरणजीत कौर और भतीजे अश्वनी ने बताया कि वे सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर को साथ लेकर दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज से मिले थे. केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ बात करने में देरी कर दी. इसी बीच 11 अप्रैल को कृपाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई.

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