केंद्र ने दी उत्पाती बंदरों को मारने की इजाजत

केंद्र ने दी उत्पाती बंदरों को मारने की इजाजत

PUBLISHED : Mar 31 , 2:40 PMBookmark and Share

केंद्र ने दी उत्पाती बंदरों को मारने की इजाजत
हिमाचल की राजधानी शिमला और वहा आने वाले लोगों पर बंदरों के बढ़ते हमलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने छह महीने के लिए बंदरों को मारने की छूट दे दी है। यह छूट केवल शिमला नगर निगम क्षेत्र में आतंक मचाने वाले बंदरों तक ही सीमित रहेगी। छह महीने के लिए यह स्वीकृति दी गई है। प्रदेश सरकार के आग्रह पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने यह अधिसूचना जारी की है।
जिसमें छह महीनों तक नगर निगम शिमला के तहत आने वाले क्षेत्र में बंदरों को वरमिन घोषित कर दिया गया है। हालांकि बंदरों के वध पर हिमाचल हाईकोर्ट ने बैन लगा रखा है। ऐसे में अब प्रदेश का वन विभाग इस नए डवलपमेंट की जानकारी हाईकोर्ट में पेश करेगा, जिसके बाद हाईकोर्ट वध पर रोक हटाती है तो लोग अपना नुकसान बचाने के लिए बंदरों का वध कर सकेंगे।
प्रदेश सरकार ने बीते साल राजधानी शिमला में स्थानीय लोगों पर बंदरों के  हमलों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, जिस पर केंद्रीय मंत्रालयों ने आपस में संवाद कर लोगों की उत्पाती बंदरों से हिफाजत के मद्देनजर में रखते हुए बंदरों को छह महीनों के लिए वरमिन घोषित किया है।
उत्पाती बंदरों से जूझ रहे राजधानी शिमला शहर के लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। अगर कोई बंदर किसी इंसान पर हमला कर नुकसान पहुंचाता है तो बिना रोक -टोक के उन्हें मारा जा सकता है बल्कि वन विभाग और वन्य प्राणी प्रभाग भी उस बंदर को मारने के लिए लोगों की मदद करेगा। हालांकि, वन क्षेत्र परिधि में बंदरों को नहीं मारा जा सकेगा। शिमला शहर में बंदरों की तादाद में हर साल इजाफा हो रहा है। आंकड़ों की मानें तो नगर निगम शिमला के तहत आने वाले क्षेत्र जाखू, समरहिल, कैथू, खलीणी, फागली, टूटीकंडी और भराड़ी में जुलाई 2015 में बंदरों की संख्या ढाई हजार के करीब थी, जो वर्ष 2013 के मुताबिक काफी ज्यादा है।
साथ ही बीते तीन सालों पर नजर डालें तो शिमला शहर में बंदरों ने 300 के करीब बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पुरुषों पर हमला कर उन्हें घायल किया है। सरकार की तरफ से पीड़ित लोगों को करीब 19 लाख की मुआवजा राशि भी दी गई है।
वन्य प्रभाग ने प्रदेश में नौ जगहों पर बंदरों की नसबंदी केंद्र खोले हैं, जिसके तहत बीते  पांच सालों में प्रभाग ने प्रदेश भर में एक लाख के करीब बंदरों की नसबंदी की है जिस पर सरकार का बीस करोड़ तक का खर्चा हुआ है। इसके बावजूद भी बंदरों की बढ़ती हुई संख्या पर लगाम नहीं लग पाई है बल्कि संख्या में  इजाफा ही हुआ है।
जरूरत पड़ी तो अवधि बढ़ाने को उठाएंगे मामला- वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि राज्य सरकार लगातार बंदरों के विषय पर संवेदनशील है। इसी वजह से सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर पीड़क जंतु घोषित करने को पत्र लिखा था।
बताया कि फिलहाल छह माह के लिए बंदरों को नगर निगम शिमला क्षेत्र में पीड़क जंतु घोषित किया गया है। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से इस अवधि को और बढ़ाने के लिए मामला उठाया जाएगा।

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