भारत की पहली महिला जासूस, रजनी पंडित सबूत हैं कि महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं

भारत की पहली महिला जासूस, रजनी पंडित सबूत हैं कि महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं

PUBLISHED : Apr 29 , 2:18 PMBookmark and Share

लड़कियों से जब ये सवाल पूछा जाता है कि तुम बड़ी होकर क्या बनोगी? तो आमतौर पर डॉक्टर, इंजीनियर, वकील आदि जवाब सुनने को मिलते हैं. पर अगर आपकी बेटी आपसे ये कहे कि मैं जासूस बनूंगी, तो यक़ीनन आप के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगेंगी. लेकिन भारत की पहली महिला जासूस होने का गौरव हासिल करने वाली रजनी पंडित की सफलता ये साबित करती है कि लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं. 
 
पिछले 25 सालों में 75,000 से भी अधिक मामलों को सुलझा चुकीं रजनी ने खुद को अलग मुकाम पर स्थापित किया है. उनके पास 20 लोगों की टीम है, जो दिन-रात उनके काम में सहयोग करती है. 'रजनी पंडित डिटेक्टिव सर्विसेज़' के माध्यम से रजनी व उनकी टीम लगातार इस फील्ड में काम कर रही है.
रजनी के पिता सीआईडी में थे और महात्मा गांधी की हत्या के केस में उन्होंने काम किया था. रजनी कहती हैं कि 'जब कॉलेज में थी, तो मैंने अपने साथ की एक लड़की को गलत लोगों की संगति में पड़ते देखा. उसने सिगरेट, शराब पीने के साथ ही गलत लड़कों के साथ समय बिताना शुरू कर दिया था. मैंने डिसाइड किया कि उसके घरवालों को ये बात बतानी है. इसके लिए ऑफिस से उसे गिफ्ट भेजने के बहाने उसका पता मांगा और फिर वहां पहुंच गई. उसके घरवालों को मैंने जब ये बातें बताईं तो उन्होंने यही कहा, क्या आप जासूस हो? उसी दिन मैंने सोच लिया था कि मुझे क्या करना है.'
रजनी ने कहा कि उन्होंने एक पत्रकार का केस लेकर उसकी समस्या सुलझाई थी. तब उस पत्रकार ने रजनी के बारे में अखबार में आर्टिकल लिखा था. फिर समाचारपत्र, दूरदर्शन, मैगज़ीन आदि का ध्यान उन पर गया. एक समय था, जब उनके जासूसी प्रोफेशन का विज्ञापन तक छापने के लिए कोई अखबार तैयार नहीं हो रहा था. इसके बाद सभी उनका इंटरव्यू छापने लगे. 47 साल की हो चुकीं रजनी अविवाहित हैं, लेकिन उन्हें इसका बिलकुल भी अफ़सोस नहीं है.
एक बार एक केस सुलझाते वक्त उन्होंने भिखारी का रूप धारण किया था और इसके लिए वे कुछ दिन भिखारियों के दल में भी रही थीं. एक घर में तो वे 6 महीने तक नौकरानी बनकर रही थीं. इस केस में एक औरत ने अपने साथी के साथ मिलकर अपने पति और बेटे की हत्या करके सारी जायदाद अपने नाम कराने का प्रयास किया था. उस औरत के ससुराल के लोगों ने उन्हें यह केस सौंपा था. इस केस में उस औरत ने कोई भी सुबूत पीछे नहीं छोड़ा था. इसके लिए नौकरानी के रूप में 6 महीने रहकर उन्होंने उस औरत का विश्वास जीत लिया था. उन्हें पता चला कि झगड़ा जायदाद व पैसों के लिए चल रहा था और उस महिला ने ही अपने साथी से मिलकर पति और बेटे का खून किया था.
 
रजनी को दूरदर्शन की तरफ से 'Hirkani Award'से सम्मानित किया गया है. रजनी के मुताबिक, एक डिटेक्टिव के लिए सबसे मुश्किल काम होता है कि वह खुद की आइडेंटिटी छुपा कर रखे. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि 'मैंने एक भिखारी, प्रेग्नेंट महिला, अंधी महिला, बहरी महिला,सारे किरदार अपने काम के लिए निभाए हैं. मेरे शब्दकोष में डर नाम का कोई शब्द ही नहीं है. 

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