मोदी सरकार का बड़ा फैसला: आर्टिकल 370 खत्म?, दो हिस्सों में बंटा J&K, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

मोदी सरकार का बड़ा फैसला: आर्टिकल 370 खत्म?, दो हिस्सों में बंटा J&K, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

PUBLISHED : Aug 05 , 6:26 PMBookmark and Share

मोदी सरकार का बड़ा फैसला: आर्टिकल 370 खत्म?, दो हिस्सों में बंटा J&K, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को आंशिक तौर पर खत्म कर दिया है। हालांकि, आर्टिकल 370 के एक खंड को नहीं हटाया गया है। मोदी सरकार के इस फैसले के साथ ही जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित राज्य बन गया है और लद्दाख को एक अलग प्रदेश बनाया गया है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पास अपना विधानसभा होगा, मगर लद्दाख के पास नहीं होगा।

सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन- जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। शाह ने कहा कि विगत में 1950 और 1960 के दशकों में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसी तरीके से अनुच्छेद 370 में संशोधन किया था। हमने भी यही तरीका अपनाया है।

गृह मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद स्वयं भी जम्मू कश्मीर से आते हैं, उन्हें चर्चा में भाग लेकर राज्य के लोगों की समस्याओं को उजागर करना चाहिए। शाह ने राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश किया । गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख के लिये केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की जहां चंडीगढ़ की तरह विधानसभा नहीं होगी। शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिविजन विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी।

विपक्ष का हंगामा:
विपक्षी सदस्यों ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी एक संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों.... जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने के प्रावधान वाले विधेयक का विरोध किया। विरोध कर रहे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक के सदस्य आसन के समक्ष आ कर बैठ गए। वहीं पीडीपी के सदस्यों पहले अपने कपड़े, फिर विधेयक और फिर संविधान की प्रति फाड़ी जिसके बाद सभापति एम वेंकैया नायडू ने मार्शलों को उन्हें सदन से बाहर करने को कहा।

अनुच्छेद 370 का उन्मूलन जम्मू-कश्मीर को भारत में पूरी तरह से समाहित करेगा
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का उन्मूलन राज्य को 'भारत संघ में ''पूरी तरह से समाहित करेगा, जैसा कि 1950 में अन्य देशी रियासतों का किया गया था। साथ ही, राज्य के बाशिंदे अन्य नागरिकों की तरह समान अधिकारों का उपयोग कर सकेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि अनुच्छेद 370 के रद्द होने से अनुच्छेद '35 ए अपने आप ही अमान्य हो जाएगा। इस तरह भूमि, कारोबार और रोजगार पर वहां के बाशिंदों के विशेषाधिकार भी खत्म हो जाएंगे। एक सूत्र ने कहा कि संसद में बताया गया सरकार का ताजा फैसला आखिरकार और पूरी तरह से जम्मू कश्मीर राज्य को भारत संघ में समाहित कर देगा। ठीक वैसे ही, जैसे कि 1950 में अन्य सभी देशी रियासतों और क्षेत्रों को किया गया था।

पी चिदंबरम की प्रतिक्रिया:
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को दावा किया कि आज का दिन भारत के संवैधानिक इतिहास में एक काला दिन है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, '' सरकार ने जो किया है वह अप्रत्याशित और जोखिम भरा कदम है। सरकार ने संविधान के अनुच्छेदों की गलत व्याख्या की है। उन्होंने कहा, '' मैं सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और देश की जनता से कहना चाहता हूं कि ''भारत का विचार गंभीर खतरे में है। यह भारत के संवैधानिक इतिहास में एक काला दिन है।

गुलाम नबी आजाद की प्रतिक्रिया:
सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में करने संबंधी संकल्प का विरोध करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी देश के संविधान का सम्मान करती है, उसकी रक्षा का संकल्प जाहिर करती है और संविधान की प्रतियां फाड़े जाने की कड़ी निंदा करती है। विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूरी कश्मीर घाटी में कर्फ्यू लगा है और राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री तथा कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। आजाद ने कहा कि राज्य के हालात पर पहले सदन में चर्चा की जाए। लेकिन सभापति ने गृहमंत्री को संकल्प पेश करने की अनुमति दे दी। सभापति ने कहा कि इस पर चर्चा के दौरान सदस्य अपनी बात रख सकते हैं।

पीडीपी नेता ने फाड़ा कुर्ता:
संकल्प के विरोध में आसन के समक्ष आ कर हंगामा कर रहे पीडीपी के सदस्यों ने संकल्प की प्रतियां भी फाड़ीं और हवा में उछालीं। इनमें से एक सदस्य ने अपना कुर्ता भी फाड़ा जिस पर सभापति ने गहरी नाराजगी जाहिर की। पीडीपी सदस्यों ने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांध रखी थी।

जदयू ने किया विरोध:
भाजपा की अगुवाई वाले सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक दल जनता दल (यू) ने जम्मू कश्मीर से संबंधित संविधान के अनुच्देद 370 को हटाये जाने के बारे में सरकार के सोमवार को राज्यसभा में पेश किये गये संकल्प और राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 का विरोध किया। राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश प्रस्ताव और विधेयक पर चर्चा के दौरान जदयू के सदस्य रामनाथ ठाकुर ने कहा कि उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता और धारा 370 के मुद्दे को अदालत के फैसले या सभी पक्षों के बीच सहमति से हुये समझौते से निकाले जाने के पक्ष में है।

बीजू जनता दल, अन्नाद्रमुक ने किया स्वागत:
बीजू जनता दल ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के संकल्प का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि ''जम्मू कश्मीर सही मायनों में आज भारत का अभिन्न अंग बना है। राज्यसभा में बीजद के नेता प्रसन्न आचार्य ने अनुच्छेद 370 को हटाने संबंधी संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी। उन्होंने कहा, ''हम भले ही क्षेत्रीय दल हैं और क्षेत्रीय आकांक्षाएं रखते हैं किंतु जब देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की बात हो तो हम पूरे देश के साथ हैं।आचार्य ने कहा, ''इस इस संकल्प का स्वागत करते हैं। जम्मू कश्मीर सही मायनों में आज भारत का अभिन्न अंग बना है।

अनुच्छेद 370 हटने पर क्या-क्या होगा बदलाव:

-जम्मू-कश्मीर अब विशेष राज्य नहीं रहेगा।
-घाटी में लग सकेगा राष्ट्रपति शासन
जम्मू कश्मीर राज्य में संविधान का अनुच्छेद-370 लागू था। इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। यानी वहां राष्ट्रपति शासन नहीं, बल्कि राज्यपाल शासन लगता था। अब वहां राष्ट्रपति शासन लग सकेगा।

-वित्तीय आपातकाल लागू होगा
भारतीय संविधान की धारा 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है। वो भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता था। अब यहां वित्तीय आपातकाल लागू हो सकेगा।

-5 साल का विधानसभा का कार्यकाल
जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। अनुच्छेद-370 हटने के बाद यहां भी विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होगा।

- अब मिलेगा आरक्षण
संविधान में वर्णित राज्य के नीति निदेशक तत्व भी यहां लागू नहीं होते थे। साथ ही कश्मीर में अल्पसंख्यकों को आरक्षण नहीं मिलता था। गृहमंत्री ने अमित शाह ने कहा कि इस बिल के तहत जम्मू कश्मीर में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।

- दोहरी नागरिकता खत्म, अलग झंडा नहीं
यहां नागरिकों के पास अब तक दोहरी नागरिकता होती है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में अलग झंडा और अलग संविधान चलता है। मगर इस फैसले के बाद अब छीन जाएगा।

-आरटीआई, सीएजी जैसे कानून लागू होंगे
संसद में पास कानून जम्मू कश्मीर में तुरंत लागू नहीं होते थे। शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, सीएजी, मनी लांड्रिंग विरोधी कानून, कालाधन विरोधी कानून और भ्रष्टाचार विरोधी कानून कश्मीर में लागू नहीं थे। ये अब लागू हो सकेंगे।

- राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान दंडनीय होगा
अभी तक जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा था। अब ऐसा नहीं होगा यानी राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर सजा होगी।

- बाहरी लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन संपत्ति खरीद पाएंगे
अभी तक बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीदने पर प्रतिबंध था।


क्या है अनुच्छेद 370 और क्यों पड़ी जरूरत:

यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है। इसके मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है। इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है।

गोपालस्वामी आयंगर ने धारा 306-ए का प्रारूप पेश किया था। बाद में यह धारा 370 बनी। इन अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिले। 1951 में राज्य को संविधान सभा अलग से बुलाने की अनुमति दी गई। नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ। 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया।

370 के साथ जम्मू कश्मीर के पास थे ये विशेष अधिकार:

    धारा 370 के तहत संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार थी।
    अलग विषयों पर कानून लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की सहमति लेनी पड़ती थी।
    जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था।
    शहरी भूमि कानून (1976) भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता था।
    जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे।
    धारा 370 के तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार था।

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