साइकिल पर सवार अखिलेश चुनावी जंग में कूदने को तैयार

साइकिल पर सवार अखिलेश चुनावी जंग में कूदने को तैयार

PUBLISHED : Jan 17 , 7:53 AMBookmark and Share



   

चुनाव आयोग के फैसले से मुख्यमंत्री अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान लिए गए और साइकिल की जंग वह जीत गए। अब पार्टी कांग्रेस और दूसरे छोटे दलों के साथ गठबंधन की राह पर निकल पड़े हैं। इससे पहले सीएम ने अपने पिता मुलायम सिंह के आवास पर जाकर लंबी मुलाकात की।

विधानसभा चुनाव का पहला चरण के लिए नामांकन काम मंगलवार से शुरू हो रहा है। अखिलेश खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि समय पहले काफी निकल चुका है। हम लोगों को साइकिल मिलने का पूरा भरोसा था। अब जल्द प्रत्याशी घोषित हो जाएंगे। चुनाव प्रचार के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश और कांग्रेस के बड़े नेता प्रचार के लिए निकलेंगे।

मुलायम खेमे में मायूसी
साइकिल सिंबल अखिलेश के हाथ में चले जाने के बाद मुलायम खेमे के शिवपाल यादव, गायत्री प्रजापति ओम प्रकाश सिंह, शादाब फातिमा, आशु मलिक, नारद राय, अंबिका चौधरी और उनके समर्थक डेढ़ दर्जन विधायकों के सामने अजीबोगरीब हालत पैदा हो गए हैं।

क्या मिलेगा बेनी के बेटे और अपर्णा को टिकट
केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को अखिलेश समर्थक मंत्री अरविंद सिंह गोप का टिकट काट कर दिया गया था। अब राकेश को साइकिल और सपा के बिना ही जूझना पड़ेगा। लखनऊ कैंट से सपा की घोषित प्रत्याशी और मुलायम की बहू अपर्णा यादव के लिए अब खुद को सपा प्रत्याशी घोषित करवाना होगा। क्योंकि अखिलेश यादव ने लखनऊ कैंट सीट पर उनका नाम अपनी सूची में नहीं रखा है, और गठजोड़ होने पर कांग्रेस अपनी जीती सीट नहीं छोड़ेगी। गायत्री प्रजापति अमेठी से चुनाव जीते थे। अब कांग्रेस से गठजोड़ होने पर उनकी सीट पर खतरा है। इन सबके लिए दो ही सूरत हैं या तो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश उनको टिकट दे दें नहीं तो उन्हें दूसरी पार्टी से ही चुनाव लड़ना होगा।

अमर सिंह पहले ही चले गए विदेश
शायद अमर सिंह को इस हालत का अहसास हो गया था। वह रविवार को ही इलाज कराने लंदन और सिंगापुर की यात्रा पर निकल गए और उन्होंने कहा कि सपा के इस झगड़े से वह चुनाव तक दूर ही रहेंगे। असल में मुख्यमंत्री अखिलेश अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने की कोशिश करते रहे हैं।

अखिलेश खेमा ने दिखा दिया दबदबा
साइकिल पर दावेदारी के लिए अखिलेश खेमे की ओर से 4 716 हलफनामा पेश किए। अखिलेश के समर्थन में 228 में से 205 विधायकों ने, 68 में से 56 विधान परिषद सदस्यों ने अखिलेश के लिए शपथ पत्र दिए। इसके अलावा 24 (लोकसभा व राज्यसभा ) सांसदों में से 15 सांसदों ने, 46 में से 28 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों ने, 5731 में से 4400 प्रतिनिधियों ने अखिलेश के समर्थन में हलफनामा दिया।

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