लैंडर विक्रम दिखा सकता है पराक्रम, सलामत मिलने के ये रहे तीन कारण

लैंडर विक्रम दिखा सकता है पराक्रम, सलामत मिलने के ये रहे तीन कारण

PUBLISHED : Sep 10 , 3:45 PMBookmark and Share

लैंडर विक्रम दिखा सकता है पराक्रम, सलामत मिलने के ये रहे तीन कारण

लैंडर विक्रम के सही सलामत मिलने की खबर के बाद अब उम्मीदें और बढ़ गई हैं। इसरो ने मीडिया को जानकारी दी कि लैंडर से संपर्क करने की लगातार कोशिश की जार ही है। चूंकि लैंडर से शनिवार (7 सितंबर 2019) तड़के 01:54AM पर संपर्क टूटा था और 02:07AM एक बार फिर से संपर्क स्थापित हुआ था। ऐसे में अब विक्रम सही सलामत मिल गया है तो उससे फिर से संपर्क होने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।
चंद्रयान 2 मिशन में जुटे वज्ञानिकों के हवाले से समाचार एजेंसी ने खबर दी कि लैंडर विक्रम लैंडिंग के तय जगह पर ही लैंड कर गया। लेकिन आपको समझना होगा कि विक्रम का संपर्क उस वक्त टूटा जब वह चांद के बेहद करीब (2 किमी) पहुंच चुका था। चूंकि चांद तक पहुंचने का काम इसरो ने बखूबी से पूरा कर लिया था, इसलिए लैंडर से संपर्क टूटने की खबरें के बीच इसरो प्रमुख के शिवन ने बताया कि चंद्रयान 2 ने अपने 90 फीसदी मिशन कामयाबी हासिल कर चुका है।
चूंकि संपर्क टूटने के 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक लैंडर विक्रम का अता-पता नहीं मिला जिससे ऐसी खबरें सामने आने लगीं कि, क्या विक्रम क्रैश कर गया?। ऐसे कयास पढ़े लिखे वे लोग भी लगा रहे थे जिन्होंने साइंस की पढ़ाई कर रखी है। लेकिन आपको बता दें कि लैंडर का चंद्रमा की सतह से बेहद नजदीक होने पर उसके क्रैश होने की बात तर्कसंगत नहीं थी। क्योंकि चांद पर कोई भी चीज यदि वह अपनी स्वाभाविक गति से गिरती है तो उसका क्रैश होना संभव नहीं है। इसी तक को और पुख्ता सबूत के तौर पर हम आपको यहां वे तीन कारण बताने जा रहे हैं जिसके कारण लैंडर विक्रम सलामत मिला।

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विक्रम के सलामत मिलने के ये रहे तीन कारण-
1- चांद का नॉमिनल गुरुत्वाकर्षण
आप यदि भौतिक विज्ञान के छात्र रहे हैं तो आपको इसके बारे में बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन जिन लोगों की भौतिक विज्ञान की समझ इस स्तर की नहीं हैं उनके लिए बता दें चांद का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का 5/6 भाग यानी कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की तुलना में चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण 83.3% होता है। चूंकि गुरुत्वाकर्षण वह ताकत होती है जिसके जरिए पृथ्वी या चांद किसी चीज को अपनी ओर खींचता है। और आसान तरीके से कहें तो 60 किलो वजनी आदमी का वजन चांद पर मात्र 10 (लगभग) किलो होगा। अब बात करते हैं लैंडर विक्रम के सलामत होने के तो चांद का गुरुत्वार्षण बेहद कम होने कारण विक्रम काफी कम गति से गिरा होगा जिससे उसका विशेष नुकसान नहीं हुआ।

2- संपर्क टूटने के बाद कंट्रोल्ड स्पीड से मुक्त होना
चूंकि लैंडर विक्रम को एक नियंत्रित गति से चांद पर भेजा जा रहा था लेकिन अनुमान है कि जब विक्रम का ऑर्बिटर से संपर्क टूटा होगा तो वह नियंत्रित स्पीड से मुक्त हो गया होगा। क्योंकि स्पीड का नियंत्रण ऑर्बिटर से किया जा रहा था। ऐसे में विक्रम संपर्क टूटने बाद चंद्रमा पर गुरुत्वार्षण की गति से ही गिरा होगा जो कि काफी कम होती है।


3- चांद का निर्वात होना
लैंडर विक्रम का सलामत रहने तीसरा कारण है चंद्रमा का निर्वात (या निर्वात जैसा) होना। निर्वात में जब कोई चीज छोड़ी जाती है तो उसके घूमने या दिशा बदलने की संभावना न के बराबर होती है। ऐसे में विक्रम से जब संपर्क टूटा होगा तो वह जिस दिशा और स्थिति में चांद की ओर जाने की बात काफी संभव लग रही है। शायद यही कारण है लैंडर विक्रम अभी सलमत है और संपर्क दोबारा हुआ तो अपना पराक्रम दिखाने के लिए तैयार रहेगा।

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